आरती का क्या अर्थ है?

आरती हिंदू उपासना की एक भक्ति-क्रिया है जिसमें देवता या पवित्र स्वरूप के सामने प्रकाश अर्पित किया जाता है। इसके साथ प्रायः स्तुति या भजन गाया जाता है। ‘आरती’ शब्द उस भजन के लिए भी प्रयोग होता है।

दीपक क्यों अर्पित किया जाता है?

अनेक हिंदू परंपराओं में प्रकाश श्रद्धा और ज्ञान का प्रतीक है। दीप अर्पित करना सम्मान, कृतज्ञता और आंतरिक स्पष्टता की भावना व्यक्त कर सकता है। अलग-अलग समुदायों में इसका अर्थ कुछ भिन्न बताया जाता है।

आरती के संदर्भ में पारंपरिक विष्णु चित्र
आरती की विधि मंदिरों और घरों में अलग-अलग हो सकती है।

आरती कैसे की जाती है?

कई घरों और मंदिरों में दीपक को देवप्रतिमा के सामने घुमाते हुए आरती गाई जाती है। सामग्री, घुमाने की संख्या और पूजा का क्रम हर स्थान पर एक जैसा नहीं होता।

अग्नि का उपयोग सावधानी से करें। दीपक को स्थिर स्थान पर रखें और कपड़ों तथा बच्चों से दूर रखें। यदि दीपक जलाना सुरक्षित न हो तो बिना लौ के आरती गाना या पढ़ना भी भक्ति का एक तरीका है।

क्या आरती और चालीसा एक ही हैं?

आरती पूजा की क्रिया और उससे जुड़ा गीत दोनों हो सकती है। चालीसा एक विशिष्ट प्रकार की स्तुति है। दोनों का उपयोग एक ही पूजा में हो सकता है, लेकिन दोनों शब्द समानार्थी नहीं हैं।

आरती पढ़ें

हनुमान आरती पढ़ें या आरती संग्रह देखें।

संपादकीय टिप्पणी

यह लेख सामान्य प्रथाओं का परिचय देता है; किसी एक क्षेत्रीय या पारिवारिक विधि को अनिवार्य नहीं मानता।