ह्रीं क्लीं श्रीं श्रीमद्गायत्री। वेदमातु निज रूप पुनीती॥ जगत जननि जगदंब भवानी। जय जय जय गायत्री बानी॥
Gayatri Chalisa
गायत्री चालीसा
वेदमाता माँ गायत्री की स्तुति में रचित भक्तिमय पाठ, जो आत्म-ज्ञान, सद्बुद्धि और परम शांति प्रदान करता है।
॥ Doha ॥
॥ Chaupai ॥
जय जय जय जगदंब भवानी। गायत्री वेदनि की बानी॥
सच्चिदानंद स्वरूप तुम्हारा। त्रिभुवन में उजियार तुम्हारा॥
ब्रह्ममयी तुम वेद जननी। सकल सिद्धियों की तुम करणी॥
ज्ञान सुबुद्धि विमल मति देहू। अज्ञान अंधकार हर लेहू॥
जो यह पाठ करे मन लाई। तापर गायत्री सुखदाई॥
॥ Doha ॥
गायत्री चालीसा जो पढ़ै, भक्ति भाव चित्त लाय। ताके सब दुःख दूर हों, परम पद सो पाय॥
समाप्त
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