श्री गुरु चरण कमल रज, धरि मस्तक सिर नाऊँ। श्री श्याम चालीसा लिखूँ, मो पर होहु सहाय॥
Khatu Shyam Chalisa
खाटू श्याम चालीसा
हारे के सहारे खाटू श्याम जी (वीर बर्बरीक) की करुणा, शीश-दान की अमर महिमा और पावन कृपा का गान करने वाला पूर्ण 40 चौपाइयों का पाठ।
जय जय श्री श्याम देवन देवा। तुमरी महिमा अमित अतिभेवा॥
खाटू शहर मध्य तुम राजत। भक्तन काज सदा तुम साजत॥
शीश दान तुम दीन्ह सुहावा। तीन बाणधारी कहलाया॥
बर्बरीक तुम नाम अनूपा। घटोत्कच के सुत अनूपा॥
मोरवी सुत अति बलवाना। पांडव कुल का दीप म्हाना॥
महाभारत का युद्ध रचाया। सब बीरों को तुम ललकारा॥
कृष्ण प्रभु तुम पास पधारे। छलिया बन परीक्षा ललकारे॥
मांगेउ शीश दान तुम पाहीं। संकोच मन किंचित नाहीं॥
हंसि कर शीश काट तुम दीन्हा। श्याम नाम कृष्ण से लीन्हा॥
तीन बाण का चामत्कारा। पल में सब संहारनहारा॥
एक बाण से निशाना साधा। सब बीरों का मान पछाड़ा॥
कृष्ण प्रभु अति हरषित हुए। शीश देव अमर कर दिए॥
खाटू में तुम प्रकट भये हो। जन जन के तुम कष्ट हरे हो॥
जो कोई तुमको ध्यान लगावै। सो फल अति उत्तम पावै॥
हार गये जो जग से सारे। तुम ही बनते उनके सहारे॥
हारे का सहारा तुम हो। भक्तन का रखवाला तुम हो॥
ध्यावै तुम्हें जो नर नारी। कटे विपत्ति भागे दुख भारी॥
संकट में तुम आप पधारो। अपने भक्तन को उबारो॥
जो कोई अर्जी तुमको लावे। सो मनवांछित फल पावे॥
ताली बजाकर जो गुण गावे। सो जीवन में सुख पावे॥
निशान चढ़ाकर जो जन आवे। ऋद्धि सिद्धि सब संपत्ति पावे॥
फाल्गुन मेला अति अनुपम। उमड़े भक्तवृंद अति मनोरम॥
पदयात्रा कर जो जन आवे। सो अति सुख आनंद पावे॥
इत्र गुलाल चढ़ावै जोई। ताके घर आनंद नित होई॥
खीर चूरमा भोग लगावे। सो प्रभु की कृपा नित पावे॥
जो कोई दीपक नित्य जलावे। ताके घर में तिमिर न आवे॥
महाबली तुम हो अवतारी। सब पर कृपा करो बनवारी॥
दीनन के तुम बंधु कहाओ। भक्तन के संकट बिसराओ॥
जो कोई तुमको नाम पुकारे। ताके तुम सब काज सँवारे॥
निर्धन को तुम धनपति कीन्हा। कोढ़ी को तुम कंचन दीन्हा॥
बांझन को तुम पुत्र दिलाओ। अंधन को तुम ज्योति दिखाओ॥
तुम सम दयालु नहिं कोई। जा पर कृपा तुम्हारी होई॥
जय जय जय श्री श्याम प्रभु ज्ञानी। सब दुख हरहु हमारे स्वामी॥
खाटू धाम की महिमा भारी। गावे नित नर और नारी॥
रींगस से जो पैदल आवे। सो मनवांछित मेवा पावे॥
जो यह पढ़े श्याम चालीसा। होय सिद्ध साखी गौरीसा॥
नित नेम से पाठ करावै। सो भवसागर पार तरावे॥
श्री श्याम प्रभु कृपा करिजै। निज दासन को अभय वर दीजै॥
शरण तुम्हारी प्रभु हम आए। हरहु सकल मम विपदा भारी॥
जय जय श्री श्याम हरे प्रभु जय जय श्री श्याम हरे। भक्त जनन के संकट क्षण में दूर करे॥
श्याम चालीसा जो पढ़े, भक्ति भाव चित्त लाय। खाटू वाले की कृपा, तापर नित्य रहाय॥
श्री खाटू वाले श्याम प्रभु, हरो सकल मम क्लेश। हृदय बसहु श्री श्याम जी, कल्याण करो सर्वेश॥

