जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल देहु उारि॥
Saraswati Chalisa
सरस्वती चालीसा
ज्ञान, सुबुद्धि, वाक्-सिद्धि और विद्या की देवी माँ सरस्वती की वंदना में रचित पावन भक्ति पाठ।
॥ Doha ॥
॥ Chaupai ॥
जय श्री सकल बुद्धि बल रासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाधर सुंदरी। वीणा वादिनि मंगल करणी॥
श्वेत वस्त्रवृता शुभ्रकांति। वीणा दंड कमंडलु शांति॥
हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी। अज्ञान तिमिर हर मात हंसिनी॥
॥ Doha ॥
मातु सरस्वती कृपा करो, देहु सुबुद्धि महान। विद्या विनय विवेक दे, करो मोही गुणवान॥
समाप्त
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