जय गणेश गिरजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
Shani Chalisa
शनि चालीसा
भगवान श्री शनिदेव की कृपा पाने, ग्रहों की पीड़ा और साढ़ेसाती के कष्टों से रक्षा हेतु भक्तिमय पाठ।
॥ Doha ॥
॥ Chaupai ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि सुवन, राखहु जन की लाज॥
जय संबंधि नवग्रह नामा। शूरवीर शनिदेव ललामा॥
सूर्य पुत्र छाया सुत भाई। श्याम वर्ण तन अति सुखदाई॥
विकट रूप धरि शत्रु संहारो। सब संत जनन के दुख निवारो॥
साढ़े साती और ढैय्या में। रक्षा करहु दीन की छैयाँ में॥
पाठ करै जो शनि चालीसा। तापर कृपा करैं जगदीशा॥
॥ Doha ॥
पाठ शनैश्चर देव को, कीन्हों ‘विमल’ तैयार। पाठ करै जो छात्र हित, होवै विद्या पार॥
समाप्त
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